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Monday, April 20, 2026

एक लम्हा।

 


ए लम्हे,

​ले चल मुझे अपने साथ, उन पलों के पास
जहाँ मैं—एक आजाद पंछी की तरह उड़ान भरूँ,
जहाँ मैं बहते निर्मल पानी सी, बस अपने बहाव में रहूँ।

​ए लम्हे,

​रोज़ ऐसे पलों को मैं जीती हूँ,
जो या तो मुझमें बसी ज्वाला से जलते हैं,
या दबी सी कुछ यादों में बस आना-जाना करते हैं।

​ए लम्हे,

​कह दो कि तुम मेरे अपने हो,
और तुममें मैं संपूर्ण हूँ।
खुला आसमान सा ये एहसास हो,

न कोई आस हो, न कोई पास...

​बस मैं और एक लम्हा!

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