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Monday, April 20, 2026

एक लम्हा।

 


ए लम्हे,

​ले चल मुझे अपने साथ, उन पलों के पास
जहाँ मैं—एक आजाद पंछी की तरह उड़ान भरूँ,
जहाँ मैं बहते निर्मल पानी सी, बस अपने बहाव में रहूँ।

​ए लम्हे,

​रोज़ ऐसे पलों को मैं जीती हूँ,
जो या तो मुझमें बसी ज्वाला से जलते हैं,
या दबी सी कुछ यादों में बस आना-जाना करते हैं।

​ए लम्हे,

​कह दो कि तुम मेरे अपने हो,
और तुममें मैं संपूर्ण हूँ।
खुला आसमान सा ये एहसास हो,

न कोई आस हो, न कोई पास...

​बस मैं और एक लम्हा!

Friday, April 17, 2026

Maan ka Hans 🦢

 राधा रानी ने कहा प्रभु से,

इसके तो भीतर का हंस रो रहा है। कुछ करो प्रभु।

(From Seema)

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During my trip to Agra and all that unfolded....